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गाँव की गलियों से डिजिटल क्रांति तक: कैसे एक 'क्रेडिट ऑफिसर' ने बदल दी अपने दोस्तों की तकदीर!

 


आज के दौर में जहाँ लोग नौकरी की तलाश में शहरों की ओर भाग रहे हैं, वहीं राजस्थान के उच्चैन गाँव के एक युवा ने यह साबित कर दिया कि अगर इरादे मजबूत हों, तो कामयाबी गाँव की पगडंडियों से भी ढूँढी जा सकती है। यह कहानी है अंकुश चौधरी की, जिन्होंने अपनी 5 साल की कड़ी मेहनत से न केवल खुद की पहचान बनाई, बल्कि अपने पूरे फ्रेंड सर्कल को 'डिजिटल एंटरप्रेन्योर' बना दिया।

संघर्ष के 5 साल और अटूट हौसला

अंकुश चौधरी, जो वर्तमान में Midland Microfin Limited में Credit Officer के पद पर कार्यरत हैं, उनकी सफलता रातों-रात नहीं मिली। दिन भर ऑफिस की जिम्मेदारी और फील्ड वर्क को सँभालने के बाद, जो समय बचता था, उसे अंकुश ने YouTube को समझने में लगाया।

पिछले 5 सालों से वे लगातार कंटेंट क्रिएशन और डिजिटल एल्गोरिदम पर काम कर रहे हैं। शुरुआत में कई मुश्किलें आईं, व्यूज कम आए, लेकिन अंकुश ने हार नहीं मानी। उनका मानना था कि "सीखना कभी बंद नहीं होना चाहिए।"

जब दोस्त बने 'डिजिटल पार्टनर

अक्सर लोग सफल होने के बाद अकेले आगे बढ़ जाते हैं, लेकिन अंकुश की कहानी अलग है। उन्होंने अपनी सीखी हुई स्किल्स को सिर्फ अपने तक सीमित नहीं रखा। उन्होंने अपने गाँव के दोस्तों को भी YouTube की बारीकियां सिखाईं।
  • कैसे वीडियो एडिट करना है?
  • कैसे सही टॉपिक चुनना है?
कैसे सोशल मीडिया के जरिए कमाई की जा सकती है?
आज नतीजा सबके सामने है। अंकुश के मार्गदर्शन की वजह से उनके दोस्त भी आज सफल यूट्यूबर बन चुके हैं और घर बैठे महीने के 30,000 से 40,000 रुपये कमा रहे हैं।

नौकरी और पैशन का बेहतरीन तालमेल

एक तरफ क्रेडिट ऑफिसर की जिम्मेदारी और दूसरी तरफ डिजिटल दुनिया की रफ्तार—अंकुश ने दोनों के बीच जो तालमेल बिठाया है, वह आज के युवाओं के लिए एक मिसाल है। वे यह संदेश देते हैं कि अपनी रेगुलर जॉब के साथ भी आप अपने सपनों को जी सकते हैं और दूसरों की मदद कर सकते हैं।

निष्कर्ष

अंकुश चौधरी की यह कहानी सिखाती है कि साधन कम होने से सपने छोटे नहीं हो जाते। अगर आपमें जुनून है, तो आप अपने साथ-साथ अपने पूरे समाज और दोस्तों की तकदीर बदल सकते हैं। उच्चैन गाँव के इस "क्रेडिट ऑफिसर कम डिजिटल गुरु" को हमारा सलाम!
क्या आपको भी लगता है कि गाँव के युवा डिजिटल इंडिया का भविष्य बदल सकते हैं? कमेंट में अपनी राय जरूर दें और इस कहानी को शेयर कर अन्य युवाओं को प्रेरित करें!

सीख: अकेला चलना आसान है, सबको साथ लेकर चलना महानता!
अंकुश चौधरी की यह कहानी हमें सिखाती है कि:
धैर्य (Patience): सफलता रातों-रात नहीं मिलती, अंकुश को भी 5 साल लगे।
जुनून: नौकरी के साथ-साथ अपने शौक को पालना और उसे बिजनेस बनाना मुमकिन है।
भाईचारा: असली जीत वही है जिसमें आपके साथ आपके यार-दोस्त भी जीतें।
उच्छर गाँव के इस लाल को हमारा सलाम!

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